Sunday, 17 February 2013

भर्ती हुई नहीं, कर्जदार हो गए

जागरण संवाददाता, इलाहाबाद : 'अब तो फार्म भरते हुए भी डर लगता है, पता नहीं कब भर्ती कैंसिल हो जाए। समझ में नहीं आता क्या करें।' 65 जिलों में प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन करने वाले प्रदीप कुमार की मनोदशा शब्दों में बयान करना मुश्किल है। प्रदीप बताते हैं कि उनके राजमिस्त्री पिता ने शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन करने के लिए पैसे देने में असमर्थता जाहिर की तो रिश्तेदारों से उधार लेकर और कोचिंग पढ़ाकर जुटाए पैसों से आवेदन शुल्क जमा किया था। सरकार द्वारा बरती गई लापरवाही के चलते भर्ती प्रक्रिया पर फिर रोक लग गई।
प्रदीप की तरह प्रदेश के लाखों बेरोजगार एक बार फिर छले जाने के एहसास से रूबरू हो रहे हैं। सात दिसंबर को आए विज्ञापन ने अभ्यर्थियों में नौकरी की आस जगाई तो 69 लाख अभ्यर्थियों ने किसी तरह आवेदन पत्र जमा किया। तीन साल पहले शिक्षकों की भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद रोक लग गई थी। इसके चलते इस बार बेरोजगारों को नौकरी की उम्मीद ज्यादा थी। मंगलवार को भर्ती को लेकर दिनभर चर्चा चलती रही। शिवकुटी के एक छात्र दीपेंद्र बहादुर सिंह कहते हैं कि विधिक नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर मुकदमा होना चाहिए। राजापुर के विनय सिंह मानते हैं कि शिक्षक पात्रता परीक्षा की पारदर्शिता अभी भी संदिग्ध है और मुख्य आरोपी जेल में हैं। एक अन्य अभ्यर्थी मृत्युंजय राय कहते हैं कि ऐसे में इस संदिग्ध परीक्षा के परिणाम को भर्ती के लिए अर्हता बना देना किसी भी दृष्टिकोण से सही निर्णय नहीं है। टीईटी को अर्हता परीक्षा बनाने वाली हाईपावर कमेटी पर और हाईकोर्ट के सवालों पर सरकार के जवाब ही इस परीक्षा का भविष्य तय करेंगे। अंकित तिवारी कहते हैं कि प्रदेश सरकार इस तरह की भर्ती कराने में सक्षम नहीं है। उसे उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की मदद से इस तरह की भर्तियां आयोजित करनी चाहिए।
बने बेसिक शिक्षा चयन बोर्ड
शिक्षक विधायक सुरेश कुमार त्रिपाठी कहते हैं कि खाली होते पदों की तुलना में नियमित भर्तियां न होने से एक साथ भारी मात्रा में शिक्षकों की भर्तियां निकाली जाती हैं। विभाग इतनी बड़ी मात्रा में भर्तियों के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाने में सक्षम नहीं है। ऐसे में एक बेसिक शिक्षा चयन बोर्ड बनाकर नियमित भर्तियां की जानी चाहिए। यह बोर्ड राजनीतिक हस्तक्षेप से दूर हाईकोर्ट की निगरानी में कार्य करे। उत्तर प्रदेश शिक्षामित्र संघ के प्रदेश मंत्री अनिल कुमार यादव कहते हैं कि प्रदेश सरकार युवाओं को ठग रही है।

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